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109 वर्षीय साधु की श्रद्धा भक्ति को देख लोग खुद-ब-खुद खींचे चले आते हैं जाने क्यों ?

109 वर्षीय साधु की श्रद्धा भक्ति को देख लोग खुद-ब-खुद खींचे चले आते हैं जाने क्यों ? 
गोरखपुर । वैसे तो गोरखपुर को मुख्य रूप से गुरु गोरखनाथ की कर्मभूमि के रूप में जाना जाता है मगर स्थानीय लोगों की मानें तो यहां गोरखपुर क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में अनेकों स्थान है जहां विभिन्न साधु-संतों ने अपने तपोबल से उस स्थान को सिद्ध पीठ बना रखा है ऐसा ही एक सिद्ध पीठ मंदिर गोरखपुर कुसमी बाजार में स्थित है जहां लगभग 109 वर्ष पूरे कर चुके महंत ने अपनी भक्ति का अलख जगा रखा है। लोगों की माने तो महंत महाराज जी सभी का भला चाहने वाले हैं । उनके पास लोग अपनी समस्याएं लेकर आते हैं ।
 वह पवित्र मन से सब को आशीर्वाद देते हैं और उन्हें यथासंभव उनकी जिंदगी में होने वाली परेशानियों से उबरने के लिए मार्गदर्शन प्रेषित करते हैं । यहां आने वाले श्रद्धालु इसे एक चमत्कार भी मानते हैं व उनके आशीर्वाद को श्रद्धा भक्ति के रूप में लेते हैं।
आपको बता दें कि खोराबार थाना क्षेत्र के कुसमी बाजार अंतर्गत सिद्ध पीठ मंदिर में श्री श्री 108 बाबा के निर्देशन में आजकल एक विशेष यज्ञ पाठ चल रहा है। श्री श्री 108 बाबा व इस मंदिर के प्रति लोगों की श्रद्धा भक्ति मनमोहित का काम करती है। यहां आने के बाद वह अपने आप को सुख समृद्धि वे शांति का आभास करते हैं। मंदिर के इर्द-गिर्द बसें आमजन समय-समय पर निरंतर कलश यात्रा व भंडारा कार्यक्रम आदि आयोजित करते रहते हैं । 
इस बार यह कार्यक्रम एक विशिष्ट मनसा द्वारा किया गया। श्री श्री 108 बाबा के निर्देशन में अपनी संस्कृति के प्रति लोगों में आस्था व संस्कृति बनी रहे इस उद्देश्य को लेकर इस बार अयोध्या के कथावाचक द्वारा कथा पाठ का भी आयोजन किया गया ।
 इस दौरान मंदिर से विशेष लगाव रखने वाले गांव के सभी लोगों ने मिलकर एक भव्य आयोजन कार्यक्रम स्थापित किया है। इस आयोजन के पहले दिन महिलाओं व बालिकाओं द्वारा 108 कलश यात्रा निकाली गई। शांति सुख समृद्धि व आस्थामय भव्य कलश यात्रा श्री श्री 108 बाबा जी महाराज के निर्देशन में यह कलश यात्रा संपन्न हुई । इस दौरान श्री श्री 108 बाबा ने सभी के प्रति आभार प्रकट किया। बाबा लेकर उनके भक्तों के मन में विश्वास के प्रति अलग-अलग भावनाएं हैं।
इस आयोजन में मुख्य रूप से साधु-संतों के साथ-साथ कुसमी बाजार के ग्रामीण जन उपस्थित रहे।