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संगीत में कथा के रसपान संघ, भक्तों ने उठाया शिव विवाह का आनंद

गोरखपुर । भक्तों के कल्याण और प्रभु का जन्म धरा धाम में होता है - राघवऋषि ऋषि सेवा समिति गोरखपुर के तत्वधान में चल रहे स्थानीय भगत चौराहा देवकी लांन प्रांगण में संगीत में कथा का रसपान कर रहे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त व्यक्ता श्री विद्या सिद्ध संत ज्योतिष सम्राट पूज्य राघव ऋषि जी ने दिव्य रहस्य उद्घाटन करते हुए बताया कि भगवान शिव का बड़े ही उत्साह पूर्वक विवाह हुआ भगवान उमापति बने शिव - शिवा का मिलन ही जीव को लोक व परलोक को सुखी करता है भगवान शिव की संस्कृति कोई भी हो कैसा भी हो सब को स्पीकर करते हैं।
                     आगे नारद मोह का वर्णन करते हुए पूज्य श्री ने कहा कि प्रशंसा तो मनुष्य की सबसे बड़ी शत्रु है प्रशंसा में मनुष्य अपने आपको संभाल नहीं पाता और उस मोहक को एकमात्र परमात्मा ही नष्ट करते हैं जिससे उसका कल्याण हो सके ऐसी नारद जी का भी मोह नष्ट हुआ तब उन्हें अपनी भूल का आभास हुआ अतः कोशिश करें कि मोह ना आए मोह के स्वामी ही अंतरात्मा में आएं।
           श्री राम जन्मोत्सव का दिव्य रहस्य उद्घाटित करते हुए पूज्य श्री ने बताया कि भक्तों को दिए हुए वचन का पालन करने के लिए व भक्तों की अनुग्रह पर ही भगवान धरा धाम  में पधारते हैं और वह अवसर आया जब भगवान भक्तों के हितार्थ: ब्राह्मणों, गो, देव और संतों का कल्याणार्थ,  हितार्थ जन्म‌  लेने का निश्चय किया स्वयं के निर्मित तन को ही अंश सहित राजा दशरथ के यहां शुभ अवसर में अवतार लिया आज संपूर्ण अयोध्या उत्साह उमंग से फूलि नहीं  समाती दिव्य कथा राम जन्म की झांकी का भक्तों ने दर्शन किया और सौरव जी ने "लाला जन्म सुनि आई"  मोहक  भजन सौरभ जी ने सुना कर  भक्तों को भावविभोर किया।
समिति के समस्त पदाधिकारी सदस्य एवं राष्ट्रीय सम  सेवक संघ के प्रांत प्रचारक माननीय सुभाष जी, गौरीशंकर गुप्ता ,रमेश सिंह जी, रुद्र त्रिपाठी, सतीश सिंह, पंडित विनोद कुमार शुक्ला, रमाशंकर त्रिपाठी, मुन्नालाल जी , बी एन द्विवेदी, बनवारीलाल निगम ,मंजू सिंह ,नीलम शुक्ला, निर्मला दुबे , विमला निगम, शकुंतला  वर्मा, रेखा सिंह ,राजू सिंह, राजू तिवारी, संतोष ,विनय पांडे, रमेश राज एवं भगत चौराहा नगर के वासी एवं बहुत से साधक गण एवं पदाधिकारी की  गौरवमई उपस्थिति मैं समिति के समस्त पदाधिकारियों व साधक व श्रद्धालुओं ने भव्य आरती कोरोना काल का पालन करते हुए संपन्न की।