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जानिए हरितालिका तीज व्रत का शुभ मुहूर्त व दुर्लभ संयोग


‼️ *हरितालिका(तीज)व्रत*  ‼️
हरितालिका(तीज) व्रत भाद्रपद शुक्ल तृतीया हस्त नक्षत्र से युक्त सर्वोत्तम होता है। और संयोग वश इस वर्ष 09 सितम्बर गुरुबार 2021 को यह दुर्लभ संयोग है। सौभाग्यवती महिलाओं का हरतालिका तीज शुभ सुहाग का पर्व है। यह त्योहार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाता है। तीज की तिथि माता पार्वती की मानी गई है।हरियाली तीज, गणगौर तीज, कजली तीज, सातुड़ी तीज की तरह हरतालिका तीज भी बड़ी तीज होती है। इस व्रत के प्रताप से अखंड सौभाग्य की शुभ प्राप्ति होती है। सनातन धर्म ही एक ऐसा धर्म है जहां पर सबके कल्याण की बात की जाती है तथा दूसरे की  कुशलता के लिए व्रत- जप-तपादि किया जाता है। यह भारतीय महिलाओं के अतिरिक्त विश्व में और कहीं नहीं है।हरितालिकाव्रत को ही तीज कहा जाता है , क्योंकि यह भाद्र मास के शुक्ल पक्ष के तृतीया तिथि को मनाया जाता है। यह शिव और पार्वती से संबंधित व्रत है। सनातन धर्म में गृहस्थ जीवन को सुचारु रूप से चलाने के लिए तथा अखण्ड सौभाग्य के लिए विशेषत: शिव - पार्वती से ही संबंधित व्रत दिये गये हैं। 


*"भाद्रस्य कजली कृष्णा शुक्ला च हरितालिका।"*
के अनुसार भाद्र शुक्ल त‌तीया को ही हरितालिका ( तीज ) का व्रत किया जाता है। यह एक निर्जला व्रत है। इसमें आचमनी को छोड़कर एक बूंद जल भी ग्रहण नहीं करने का विधान है। यह अहोरात्र का सर्वाधिक कठिन व्रत है। यह द्वितीया युक्त तृतीया में नहीं किया जाता है। तृतीया यदि चतुर्थी युक्त हो तो उसमें यह व्रत करना चाहिए। द्वितीया पितामह की तिथि होती है और चतुर्थी पुत्र की तिथि है। अत: द्वितीया युक्त तृतीया का निषेध और चतुर्थी युक्त तृतीया का योग श्रेष्ठ होता है। इस वर्ष 09 सितम्बर भाद्रपद शुक्ल हस्तनक्षत्र युक्त तृतीया को पुजन के लिए पुरा दिन समय है, लेकिन बिशेषकर प्रदोश का समय सर्वोत्तम होगा। व्रत का पारण अगले दिन 10 सितम्बर को प्रात: 05:50 से दोपहर 01 बजे तक उत्तम है।

*जय श्री कृष्ण। ✍🏻
आचार्य आकाश तिवारी सम्पर्क सूत्र 9651465038*