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ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन से गांव का हो रहा है कायाकल्प: जिलाधिकारी

*ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन से गांव का हो रहा है कायाकल्प: जिलाधिकारी* 
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण फेस 2 के अंतर्गत गांव में स्वच्छता के स्तर में हो रहा है गुणात्मक सुधार।

गांव-गांव में कराया जा रहा है सोक पिट एवं कंपोस्ट पिट का निर्माण। 

स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण फेज 02 के लक्ष्य निर्धारित है:-

➡ओडीएफ की स्थिति को बनाए रखना।
➡ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सॉलि़ड वेस्ट मैनेजमेंट।
➡तरल अपशिष्ट प्रबंधन लिक्विड वेस्ट मैनेजमेंट 
➡ग्रामीण क्षेत्र आमतौर पर देखने में साफ सुथरा विजिबल क्लीनेस होना चाहिए।
100 दिवसीय स्थायित्व एवं सुजलाम अभियान के अंतर्गत गांव में स्वच्छता के स्थायित्व एवं उस पर क्रियान्वयन पर तेजी से किया जा रहा है कार्य।
निर्धारित लक्ष्य के अनुसार विकासखंड वार ग्रामों में बनाए जा रहे हैं सोकपिट एवं कंपोस्ट पिट।
➡1 विकासखंड बांसगांव में सामुदायिक सोख्ता गड्ढा 1035 व्यक्तिगत सोख्ता गड्ढा 2070
➡2 विकासखंड बड़हलगंज में सामुदायिक सोख्ता गड्ढा 1030 व्यक्तिगत सोख्ता गड्ढा 2060
➡3 विकासखंड बेलघाट में सामुदायिक सोख्ता गड्ढा 1285 व्यक्तिगत सोख्ता गड्ढा 2570
➡4विकासखंड भरोहिया में सामुदायिक सोख्ता गड्ढा 380 व्यक्तिगत सोख्ता गड्ढा 760
➡5 विकासखंड भटहट में सामुदायिक सोख्ता गड्ढा 470 व्यक्तिगत सोख्ता गड्ढा 940
➡6 विकासखंड ब्रम्हपुर में सामुदायिक सोख्ता गड्ढा 605 एवं व्यक्तिगत सोख्ता गड्ढा 1210
➡7 विकासखंड कैंपियरगंज में सामुदायिक सोख्ता गड्ढा 630 एवं व्यक्तिगत सोख्ता गड्ढा 1260
➡8 विकासखंड चरगांवा में सामुदायिक सोख्ता गड्ढा 254 एवं व्यक्तिगत सोख्ता गड्ढा 490
➡9 विकासखंड गगहा में सामुदायिक सोख्ता गड्ढा 1155 एवं व्यक्तिगत सोख्ता गड्ढा 2310
➡10 विकासखंड गोला में सामुदायिक सोख्ता गड्ढा 1000 एवं व्यक्तिगत सोख्ता 2000
➡11 विकासखंड जंगल  कौड़ीया में सामुदायिक सोख्ता गड्ढा 545 एवं व्यक्तिगत सोख्ता गड्ढा 1090
➡12 विकासखंड कौडीराम में सामुदायिक सोख्ता गड्ढा 1075 एवं व्यक्तिगत सोख्ता गड्ढा 2150
➡13 विकासखंड खजनी में सामुदायिक सोख्ता गड्ढा 1220 एवं व्यक्तिगत सोख्ता गड्ढा 2440
➡14विकासखंड खोराबार में सामुदायिक सोख्ता गड्ढा 355 एवं व्यक्तिगत सोख्ता गड्ढा 710
➡15 विकासखंड पाली में सामुदायिक सोख्ता गड्ढा 855 एवं व्यक्तिगत सोख्ता गड्ढा 1710
➡16विकासखंड पिपराइच में सामुदायिक सोख्ता गड्ढा 405 एवं व्यक्तिगत गड्ढा 810
➡17विकासखंड पिपरौली में सामुदायिक सोख्ता गड्ढा 780 एवं व्यक्तिगत सोख्ता गड्ढा 1560
➡18 विकासखंड सहजनवा में सामुदायिक सोख्ता गड्ढा 750 एवं व्यक्तिगत सोख्ता गड्ढा 1500
➡19 विकासखंड सरदार नगर में सामुदायिक सोख्ता गड्ढा 365 एवं व्यक्तिगत सोख्ता गड्ढा 730
➡20 विकासखंड उरुवा में सामुदायिक सोख्ता गड्ढा 1930 एवं व्यक्तिगत सोख्ता गड्ढा 3860 परिवारों में निर्माण कराया जाना है।
जनपद गोरखपुर में कुल 16115 सामुदायिक सोख्ते का निर्माण कराया जाना है तथा व्यक्तिगत सप्ताह गड्ढों का निर्माण 32233 की संख्या में कराया जाना है जिससे एक व्यापक स्तर पर गांव में जलजमाव एवं वाटर रिचार्जिंग तथा बेहतर स्वच्छता प्रबंधन की व्यवस्था सुनिश्चित कराए जाने हेतु विभिन्न स्तर पर गतिविधियां संचालित की जा रही है जिसमें जनपद के सभी पंचायत सचिव एवं समस्त ग्राम प्रधान तथा सहायक विकास अधिकारी पंचायत एवं समस्त खंड विकास अधिकारियों को प्रशिक्षण के दौरान विशेष जानकारी तकनीकी तौर पर भी दिया जा चुका है साथ ही मनरेगा योजना के अंतर्गत तकनीकी सहायक को रोजगार सेवकों एवं स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण योजना में तैनात खंड प्रेरकों की भी भूमिका स्थल चयन एवं उसके प्रयोग तथा उसके रखरखाव एवं व्यक्तिगत सदुपयोग के बारे में भी जानकारी प्रदान की जा रही है।
जनपद जनपद के प्रति राजस्व ग्राम में कम से कम 5 सामुदायिक सोख्ता गड्ढे का निर्माण कराया जा रहा है जिस पर संपूर्ण धनराशि स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण योजना के अंतर्गत किया जाएगा जिसमें एक सामुदायिक सकते गड्ढे की लागत रुपया 11700 है तथा प्रत्येक राजस्व ग्राम में 10 व्यक्तिगत सोख्ता गड्ढे का निर्माण मनरेगा योजना के अंतर्गत कराया जा रहा है एक सामुदायिक खाद गड्ढा की निर्माण लागत ₹15000 निर्धारित किया गया है।
जनपद में 16115 सामुदायिक सकते गड्ढे के निर्माण में कुल 24 करोड़ 17 लाख ₹25000 की धनराशि स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण योजना के अंतर्गत देखी जानी है तथा 32230 सोकपिट निर्माण हेतु कुल रुपया 3 करोड़ 77 लाख 9000 की धनराशि मनरेगा योजना के अंतर्गत व्यय की जानी है जिसकी तकनीकी  विधि व्यवस्था की देखरेख विकास खंड स्तर पर खंड विकास अधिकारी एवं अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा के द्वारा किया जा रहा है।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण फेस 2 जो 2020 से 2025 तक संचालित किया जा रहा है इसके निर्मित मुख्यता ठोस एवं तरल अपशिष्ट पदार्थों के प्रबंधन की व्यवस्था करना एवं सृजित संसाधनों की सतत क्रियाशीलता को बनाए रखने हेतु गतिविधियां संचालित की जा रही है जिससे निश्चित तौर पर जल जनित बीमारियों एवं विशेष तौर पर पूर्वांचल के लिए अभिशाप बन चुके हैं और इसके रोकथाम हेतु अच्छी सफलता मिलेगी शौचालयों के प्रयोग में भी काफी हद तक प्रतिशत बढ़ेगा स्वच्छता अभियान को एक नई ऊर्जा के साथ जनपदों में संचालित किया जा रहा है जिस किसी भी योजना के अंतर्गत लोगों के घरों में अभी भी शौचालयों की सुविधा उपलब्ध नहीं है उन्हें भी एसबीएम दुतीय पेज के लक्ष्य में चिन्हित करते हुए उनके भी घरों में शौचालयों की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है जिसके लिए पी एफ एम एस के माध्यम से सीधे लाभार्थी के खाते में दो किस्तों में प्रथम किस्त रुपया 6000 एवं द्वितीय किस्त रुपए अच्छा हो जाए इस प्रकार कुल 2 चरणों में ₹12000 के प्रश्न धनराशि लाभार्थी के खाते में भेजी जा रही है जनपद गोरखपुर में अभी तक 24258 शौचालयों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है जिसके साथ अब तक 11868 लाभार्थियों के बचत खातों में धनराशि की जा चुकी है।
इस योजना को लागू करने से गांव में बेकार जल को वाटर रिचार्जिंग के रुपए तौर पर प्रयोग किया जा रहा है तथा पानी के हो रहे दो हमको भी बचाया जा रहा है यहां तक कि जानवरों के सदुपयोग हेतु जो पानी प्रयोग किया जा रहा है उसके भी रखरखाव की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत द्वारा कराई जा रही है 80% जल जनित बीमारियां जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार परिलक्षित हो रही थी उसे अब निश्चित तौर पर काफी हद तक कामयाबी पाई जा चुकी है। सतत विकास लक्ष्य एसडीजी गोल को भी पूरा करने में सार्थक कदम होगा इस कार्य से स्वच्छ सर्वेक्षण ग्रामीण 2021 में भी ग्राम पंचायत को 2 अंक मिलेंगे जिससे ग्राम पंचायत के स्वच्छता के स्तर में भी सुधार का प्रतीक होगा।
स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण फेस टू के लागू होने से गांव से घरों गांव के घरों से निकलने वाले कूड़े कचरे का भी निदान मिलेगा तथा उसके समुचित प्रबंधन पर भी ग्राम पंचायतों के द्वारा बिना किसी बाधा के कार्य किया जा रहा है। ग्रामों में लोगों को स्थानीय तौर पर ग्राम स्तर पर महात्मा गांधी रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत रोजगार भी मिलेगा आय के संसाधन भी बढ़ेंगे और लोगों के जीवन स्तर में सुधार भी होगा ग्राम स्तर पर गरीबों के लिए रोजगार का सृजन भी सुनिश्चित होगा।

क्षेत्रीय नगर एवं पर्यावरण अध्ययन केंद्र लखनऊ द्वारा सर्वेक्षण के माध्यम से यह ज्ञात हुआ है कि प्रदेश में औसतन 77 ग्राम ठोस अपशिष्ट प्रति व्यक्ति प्रतिदिन जनित होता है और ग्राम पंचायतों की जनसंख्या के अनुसार ठोस अपशिष्ट की मात्रा में विविधता पाई जाती है। स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के अंतर्गत जैविक अपशिष्ट के प्रबंधन हेतु सफल पद्धति के रूप में कंपोस्टिंग पर बल देता है तथा सभी ग्रामों में सामुदायिक स्तर पर गीले अपशिष्ट का प्रबंधन खाद गड्ढा पीठ कंपोस्टिंग के माध्यम से किया जाना है पीठ कंपोस्टिंग दो प्रकार की होती है सामुदायिक स्तर पर कच्चा खाद गड्ढा सामुदायिक स्तर पर पक्का खाद गड्ढा कंपोस्टिंग ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की एक ऐसी पद्धति है जिसमें ठोस कचरे के ऑर्गेनिक घटकों को जैविक रूप से विविध विघटित किया जाता है और उसे नियंत्रित स्थितियों में ऐसे रूप में परिवर्तित किया जाता है जिससे पर्यावरण पर विपरीत प्रभाव डाले बिना उसे आसानी से प्रबंधित संरक्षित किया जा सकता है या जमीन में खाद के रूप में मिलाया जा सकता इस प्रक्रिया में तापमान बनता है और जैविक रूप से उत्पन्न इस गर्मी के कारण अंतिम उत्पाद कंपोस्ट खाद होता है जो कि कीटाणुओं और पौधों के बीच से मुक्त तथा स्थिर होता है इसके उपयोग से मिट्टी में पोषक तत्व को बढ़ाता है।

सफल ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के सिद्धांत में सामग्री का उपयोग करने वाला व्यक्ति ही उसे जनित अपशिष्ट के प्रबंधन के लिए जिम्मेदार है अपशिष्ट की छटाई जैविक व अजैविक या उसके उपभोग के वर्गों में पृथक्करण अच्छे अपशिष्ट प्रबंधन की कुंजी है कुशल ठोस अपशिष्ट प्रबंधन एक व्यवहार में बदलाव का कार्यक्रम है जिस स्थान पर अपशिष्ट जनित होता है उसके जितना नजदीक उसका उपचारित किया जाए अपशिष्ट प्रबंधन का कार्य उतना ही सफल होता है एक सफल अपशिष्ट प्रबंधन कार्यक्रम केवल सामूहिक जिम्मेदारी के माध्यम से ही हो सकता है।

स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण फेस टू में पूर्व से निर्मित व्यक्तिगत शौचालय जो उपयोग में नौ लाए जाने की वजह से अथवा अन्य तकनीकी कारणों से निश प्रयोजन से हो गए हैं उनके रिट्रोफिटिंग का कार्य भी कराया जा रहा है यह कार्य वित्त आयोग के अंतर्गत उपलब्ध सैनिटेशन मत टाइट फंड की धनराशि से कराया जा रहा है। इससे हर स्तर पर स्वच्छता में जो भी जिस स्तर पर कमियां मिल रही है उस पर भी गहन पूर्वक अध्ययन करते हुए विचार कर उस पर भी काम किया जा रहा है।

जनपद में कूड़े का संग्रह गांव में नियमित रूप से घरों और ठोस अपशिष्ट अब उत्पादन उत्पादन कर्ताओं से अपशिष्ट एकत्र करने के लिए योजना विकसित की जा रही है तथा गृह स्वामी निर्धारित स्थान पर सामुदायिक कूड़ेदान से भी इसे डालकर प्रयोग करने तथा घरों एवं ठोस अपशिष्ट उत्पादन करता हूं जैसे छात्रावास बाजार विवाह हॉल एवं अन्य धार्मिक प्लेस आदि की भी पहचान कर उन्हें उत्पन्न कचरे की मात्रा को उचित प्रबंधन हेतु कार्यवाही की जा रही है।