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नहीं सुधर रहा बिजली विभाग,4 साल पहले लाइन काटा फिर मृतक के नाम भेजा 139685 रुपये का बकाया नोटिस

बस्ती-बिजली विभाग द्वारा फर्जी बिल भेजकर गॉव की भोली-भाली जनता का उत्पीड़न करने का खेल किसी से छिपा नहीं है । 

लोकल फाल्ट व कटौती रोस्टर का बहाना बनाकर आपूर्ति बाधित करना विभाग की पहचान बन चुकी है । 

शासन के 16से18 घंटे निर्वाध बिजली आपूर्ति के नाम पर गेंहूँ के सिंचाई के इस दौर में उपभोक्ताओं को कितने घंटे की बिजली मिल रही है यह भी किसी को बताने की जरूरत नहीं है । 

सप्लाई मिलने से ज्यादा कष्टकारी विद्युत आपूर्ति मिलने का समय है कहीं रात के 12 बजे से सुबह 6 बजे तक की सप्लाई तो दिन में हर घंटे 4 से 6 बार में की जाने वाली कटौती |

2018 में बिजली विभाग ने काट दिया था कनेक्शन

प्राप्त समाचार के अनुसार जनपद के विकास खण्ड कप्तानगंज में स्थित विद्युत उपकेन्द्र कप्तानगंज में बिजली विभाग द्वारा उत्पीड़न का एक नया मामला प्रकाश में आया है उपभोक्ता द्वारा कप्तानगंज कस्बे में  विद्युत कनेक्शन लिया गया था जिसे 18039 रुपया विद्युत बकाया के कारण लाइन काटकर उपभोक्ता को  नोटिस दी गयी थी और पुनःलाइन जोड़ी नहीं गयी | 

फर्जी बिल भेजने के मामले में अपनी पहचान बना चुका है जनपद मे बिजली विभाग

इसी दौरान उपभोक्ता द्वारा अपना लाइन डिस्कनेक्ट करने हेतु बिजली विभाग,तहसीलदिवस अधिशासी अभियंता जनसुनवाई इत्यादि जगहों पर प्रार्थना पत्र भी दिया गया । 

अब बिना बिजली दिए बिजली विभाग 18039 के बदले भेजा 139685 रुपये की बकाया नोटिस

दुर्भाग्यवश उपभोक्ता की इसी दौरान लगभग 4वर्ष पहले ही मौत भी हो गयी अब बिजली विभाग दिवंगत उपभोक्ता का लाइन डिस्कनेक्ट करने के बजाय दिवंगत के घर 139685 रुपये बकाया की नोटिस लेकर जा पहुँचा है जिसे देख दिवंगत उपभोक्ता के सगे सम्बन्धियों के पैरों तले की जमीन खिसक गयी । 

2018 में था उपभोक्ता का 18039 रुपये बकाया

यहाँ इस बात का उल्लेख कर देना जरूरी होगा कि दिवंगत की जब 18039 रुपये के बकाए में वर्ष 2018 में ही लाइन काट दी गयी जो अभी तक कभी जुड़ी नहीं तो फिर बिजली विभाग दिवंगत उपभोक्ता के परिजनों को किस बात का 139685 रुपये बकाया की नोटिस थमा रहा है । 

पीड़ित के परिजनो ने बताया कि नोटिस देने हेतु जब बिजली विभाग के लोग आए थे तो हम लोगों ने अपने सारे कागजात दिखाए पर वे हमारी एक न सुने और बकाया जमा करने की जिद पर अड़े रहे ।

रिपोर्टर-अफ़ज़ाल क़ुरैशी-बस्ती

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